बरेला - शारदा माता मंदिर
किंवदंतियों मे जीते भारत के ग्रामीण अंचल मे बरेला एक छोटा सा कस्बा है, जहाँ एक मित्र से मिलने पहुचे तो उन्होने अपने क्षेत्र के दो प्रमुख स्थानों के दर्शन करवाए | तीसरा स्थान गौमुख (जहाँ गौमुख से जल स्त्रोत का उदगम बताया गया) समयाभाव के कारण नही देख सके |
ये चित्र बरेला के शारदा माता मंदिर के हैं | इस मंदिर की ख़ास बात देहात मे मंदिर के रंग रोगन है | मंदिर अत्यंत आकर्षित प्रतीत होते हैं | दूसरी बात जो मेरे समझ से परे रही वो यह की चाहे तो इस मंदिर की अधीष्टात्री शारदा देवी हों, या प्रांगण मे गणपति, विष्णु-लक्ष्मी की प्रतिमाएँ | सभी की आँखें चढ़ि हुई हैं | इसे योगनिद्रा की मुद्रा कहा जाए या मूर्ति बनाने वाले की कल्पना | ईश्वर ही जाने |
बरेला शारदा माता मंदिर के पर्वत के नीचे ...चढ़ाई शुरू करने से पहले ....
खुली छत के नीचे ... हनुमान जी की यह 15 फुट उँची प्रतिमा अनायास ध्यानाकर्षित करती है |
बरेला - जमुनिया मे बाबा ठन ठन पाल जी को लोग साईं बाबा के समय का बताते है | और साई बाबा की समकक्ष ही मानते हैं | दरअसल बाबा इस क्षेत्र के अपने साईं बाबा हैं |
फ़र्क इतना है की बस बाबा को इस क्षेत्र के लोग ही जानते हैं |
कहा जाता है की बाबा के श्राप के कारण ही बरेला का पानी पीने योग्य नही रहा | फ्लोराइड की मात्रा अत्यधिक है यहाँ के पानी मे |अन्य किंवदंतिया हैं बाबा की जो जल्दी ही डॉक्युमेंटरी के रूप मे प्रकाशित हो रही है |
किंवदंतियों मे जीते भारत के ग्रामीण अंचल मे बरेला एक छोटा सा कस्बा है, जहाँ एक मित्र से मिलने पहुचे तो उन्होने अपने क्षेत्र के दो प्रमुख स्थानों के दर्शन करवाए | तीसरा स्थान गौमुख (जहाँ गौमुख से जल स्त्रोत का उदगम बताया गया) समयाभाव के कारण नही देख सके |
ये चित्र बरेला के शारदा माता मंदिर के हैं | इस मंदिर की ख़ास बात देहात मे मंदिर के रंग रोगन है | मंदिर अत्यंत आकर्षित प्रतीत होते हैं | दूसरी बात जो मेरे समझ से परे रही वो यह की चाहे तो इस मंदिर की अधीष्टात्री शारदा देवी हों, या प्रांगण मे गणपति, विष्णु-लक्ष्मी की प्रतिमाएँ | सभी की आँखें चढ़ि हुई हैं | इसे योगनिद्रा की मुद्रा कहा जाए या मूर्ति बनाने वाले की कल्पना | ईश्वर ही जाने |
बरेला शारदा माता मंदिर के पर्वत के नीचे ...चढ़ाई शुरू करने से पहले ....
खुली छत के नीचे ... हनुमान जी की यह 15 फुट उँची प्रतिमा अनायास ध्यानाकर्षित करती है |
बरेला - जमुनिया मे बाबा ठन ठन पाल जी को लोग साईं बाबा के समय का बताते है | और साई बाबा की समकक्ष ही मानते हैं | दरअसल बाबा इस क्षेत्र के अपने साईं बाबा हैं |
फ़र्क इतना है की बस बाबा को इस क्षेत्र के लोग ही जानते हैं |
कहा जाता है की बाबा के श्राप के कारण ही बरेला का पानी पीने योग्य नही रहा | फ्लोराइड की मात्रा अत्यधिक है यहाँ के पानी मे |अन्य किंवदंतिया हैं बाबा की जो जल्दी ही डॉक्युमेंटरी के रूप मे प्रकाशित हो रही है |








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